Poetry

ढूंढती  क्या  खामोश  नजरे इन  तड़फथे   होटो  पर  क्या  हैहम  क्या  समझ  बैठे इन  तड़फथे  होटो  पर  क्या  हैबहती  हुई   मस्त  पवन  को  क्या  समझ  बठे ढूंढती क्या खामोश  नजरे इन गिरते अश्क  में  क्या  है यू  तनहा  बैठे   की  ख्याल  आया  तेरा  दिल  मेंउम्मीद  है  दिल  को  तेरीहम  हर  शाम  सजा  बैठे गीत मेरा  दिल  क्या  मुझे  दूर  हुआये  वक़्त  कितना  मनहूस   हुआ कोई  क्या  अब  उस  को  रोकेगाजो  अश्क  बह  बेठे अब  छुपते  छुपते फिरते  हैये  कैसा  दर्द  लगा  बठेमेरा  दिल  क्या  मुझसे  दूर  हुआना  दिल  ही  रहा  ना  उसकी  कलीबस  इतनी  खता  की  दिल  दियाजब  दिल  दिया  तो  तड़फ  मिलीये  कसे  अश्क  गिरे  हमसेये  कसे  दिल  लगा  बेठे   प्यार प्यार   तो   धड़कन   है   दिल   कीइसको   ना    तुम   रूसवा  करोदिलो  को  दिलो  से  जोड़ोरिस्तो  को  ना  यू  सरे आम  करोआज  फिर  दुश्मनो  का  सलाम  आया  है दोस्ती  करने  का   पैगाम   आया  है बिच  रहा  में  छोड़  गए  थे  जो  हमकोउन्होंने  फिर  साथ  चलने  का   वादा  निभाया  हैछोड़ी  आज  हमने  दिले-ऐ-तमन्ना  कोआज  फिर  खुशिया  मानाने  का  शौक हैकही  गम  पीने  का  शौक  है  कही  गम  पिलाने  का शौक  हैआज  फिर  मयखाना  जाने  का  शौक   हैपी  के फिर गुनगुना  का  शौक  है 

रूप नंदनी

मुझे  तेरी   जुस्तजू  ही  नहीं  आरजू  भी  है

कुम्द्नी  को  जो  कर  दे  दीवाना  तू   ऐसी  खुशबू  है
रग रग के  उस  रब  ने  तुझे  है  बनाया
क्या  हाल  होगा  उस  भँवरे का  जिसका  दिल  तुझ  पे  आया
इस  रूप  नंदनी  को  देख सारा  जग  है  जगमगाया 
देख  इसे  चाँद  ने  कहा  एक  चाँद  जमीं  पर  है  आया
ऐ  हय-यौवन  की  मल्लिका  में  तुझ  पे  निसार  हूँ
बस  आख़िरी  तमन्ना  जीवन  भर   तुझको  प्यार दूँ
किसको  है  पता  वो   जायेगा  कहाँ
तुझे  देखू  बस  देखू  और  जिन्दगी  गुजर  दो   


मेरी पहचान        

मेरी  कल्पना  की  उडान अभी  बाकी  है 
मेरे  सपनो  में  जान  अभी  बाकी  है
माना  दूर  बहुत  है  मंजिल  अभी 
मुझे  जाना  है  वहां   मेरी  पहचान  अभी  बाकी  है 
माना  लड़खाते  है  कदम  चलने  में  अभी
पर  कदमो  में  अभी  जान  बाकी  है
मुझे  चलना  है  दूर  बहुत  मेरा  अंजाम  अभी  बाकी  है
मेरी  पहचान  अभी  बाकी  है मंजिल  मिलेगी  मुझे  पुरा  एतबार  है किसी  की  दुआ का असर मुझपे  जो  सवार  है
मुझे  जाना  है  वहाँ  मेरी  पहचान  अभी  बाकी  है  
दिल में संजोये है सपने मैंने मुझे जाना है दूर 
मेरा इम्तहान अभी बाकी है माना काँटों की चूभन भी है पैरो में अभी मुझे जाना है दूर मेरा मुकाम अभी बाकी है 
माना कठिन है डगर चलने में अभी मुझे पाना है
मुकाम मेरी मंजिल अभी बाकी है मुझे जाना है दूर 
मेरे लहू मे जान अभी बाकी है हौसले बुलंद है चलने में अभी
यंकी है मिलेगी मंजिल चलने में यूही मुझे जाना है दूर 
मेरी पहचान अभी बाकी है  


 जीत   रार नहीं ठानूंगा हार नहीं मानूंगा,
 जीतने चला हूँ जीत के ही जाउंगा |
 दम में ज़ोर लगा दूगा,
 दिल मैं बैठ जाऊँगा |
 जिन्दगी जीतने चला हूँ,
 मंजिल को पार कर जाउंगा |
 रास्ते की प्यास को तेज धुप में पिघला दूंगा,
 धुप को भी अपनी गर्मी से नहला  दूंगा |
 जीतने चला हूँ जीत के ही जाउंगा,
 जिन्दगी को मौत से मिलाता चलूगा |
 रात को दिन से लड़ता चलूगा,
 जब तक मिलता रहेगा मन |
 मैं दिल को यूँही लड़ता चलूँगा,
 न थका हूँ ना थाकुंगा |
 मैं सूरज हूँ यूही दमकता रहूँगा,



 मेरी चाहतें मैं पानी की तरह आज़ाद होना चाहता हूँ |
 बिना पंखो के सरहदों के पार जाना चाहत हूँ ||
 चिडिया की तरह गुनगुना चाहता हूँ,
 फूलों की तरह महकना चाहता हूँ |
 धूप की तरह खिला और रोशनी की तरह पवित्र बनना चाहता हूँ,
 आसमान में उडकर बादलो को छूना चाहता हूँ |
 धरती पे रहकर मिटटी में मिलना चाहता हूँ,
 मैं चाहत को चाहत की तरह बनाना चाहता हूँ ||
 रगों में घुलकर  ह्रदय  में  बसना  चाहता  हूँ,
 मै  दिन की चंचलता रात की शांति  पाना चाहता हूँ |
 सत्य  की  तरह  दृढ,
 विश्वास की तरह पूर्ण होना चाहता हूँ ||
 मै सूर्य की उर्जा तथा चांदनी की ठंडक पाना चाहता हूँ 

जिन्दगी के बाद मौत को भी जीना चाहता हूँ       


पल  बस उस एक पल की आस में हम हर पल को खोते जा रहे है हर पल में है कितना कुछ लेकिन जानते क्यों नहीं आशाओं में बंधे हम -ऐ- जिन्दगी  तुझको यू ही ढोते जा रहे है जाने कौन सी कसक है की हम रोते जा रहे है नींद आती नहीं तन्हाई में फिर भी यू कहते है सोने जा रहे है     


मेरा मन  
मिटटी का मन मिटटी का तन 
मेरा जीवन मेरा परिचय 
मेरा परिचय मेरा मन 
मेरा मन चँचल चितवन 
चँचल चितवन मेरा बचपन 
मेरा बचपन कोमल ह्रदय 
कोमल होते मेरे खिलोने 
मेरे खिलोने गुड्डा गुडिया गुड्डा 
गुडिया के खेल पुराने 
पुराने पीपल  की  छाव  सुहानी 
सुहानी मेरी पडोस की लड़की 
लड़की मुझको लगती है प्यारी 
प्यारी मेरी दादी की कहानी 
कहानी में राजा की होती थी रानी 
मेरा बचपन मेरी कहानी 
मिटटी का तन मिटटी का मन 


मेरा नाम मेरी पहचान  
मेरा नाम मेरी पहचान कौन जाने जाना है किधर 
मेरी जुस्तजू मेरी तमन्ना मेरे सपने मेरी कहानी 
मुझे जिन्दगी से नहीं जिन्दादिली से प्यार है 
छोड के जाऊ कहा मुझे तुझे से ही तो प्यार है  
प्यार में प्यार से प्यार  हो गया 
मुझे तुझ से नहीं तेरी जिन्दादिली से इकरार हो गया        


मानव 

देख दशा आज मानव की दिल ने एक आवाज की
ह्रदय चीर के रख दे रहा है आज इन्सान इन्सान का 
हर्दय में रक्त बचा नहीं जितना बचा रक्त धमनियों में तेजाब की 
खूनी दिवाली खूनी  होली अब तो लगती है जैसे ठिठोली  
अब तो बहरा लगता है जो उत्तर न देता किसी फरयाद की 
हाय ऐसा खूनी खेल मचा कर मानव नाम देता आतंकवाद की 
देख राम देख रहीम तेरी दुनिया में  होता कैसा हाहाकार है 
लोट खसोट ,बलात्कार,चोरी होती चारो और है 
कहता '' मोहीत '' एक दिन ऐसा भी आएगा 
जब मानव माथा पकड़ कर रोता ही रोता ही जायेगा 
हाथ नहीं आयगे तब कुछ 
मानव मिटटी में  मिल जायेगा 

न थका हु न थाकुंगा  

न थका हु न थकुगा 
रुख दरिया का भी मोड़ दूंगा,
मै सूरज हु युही दमकता रहूँगा,
जब तक जान है इस एहले-चिराग में,

पर्वतों की ऊंचाई को नापता चलूँगा 
न रोक सकेगी कोई आंधी इस दुनिया में,
मै तूफ़ान हु आंधी का भी रुख मोड़ता चलूँगा,
राह मै पत्थर होंगे अगर,पत्थरो को ही राह बनता चलूँगा.

न थका हु न थकुगा,
मै सूरज हु युही दमकता रहूँगा... 

चीरता चलूँगा अंधेरे की शिराओं को,
गिरता चलूँगा नफरत की दरे-दीवारों को,
न रोक सकेगा कोई समुद्र इस दुनिया का,
मै साहिल हु समुद्र को डुबाता चलूँगा... न थका हु न थकुगा,
मै सूरज हु युही दमकता रहूँगा......    



 कॉलेज  की  यादे   
S.S.I.T.M ALIGARH


यादे  ये  कॉलेज   की  यादे 
दोस्तों  का  याराना  दोस्तों  की  महफ़िल
वो  कैंटीन  की  चाय  वो  पीना  पिलाना
वो  पुरण  की  सिगरेट  के  छले बनाना 
वो  ssitm की  बसे  वो  बसों में  लटकनावो  ssitm (सिस्टम) की  लड़कियांवो  उनका  संवारना  लडको  को  देखकर इतरा कर  चलना
वो  कॉलेज  की  सीढ़ी  पर  प्यार  भरी  बाते
वो आते  जाते  पर  कमेन्ट  की  बरसाते 
वो सिलेबस  की   टेंशन
वो  एग्जाम   की  रात  में  सिगरेट  के  कस
वो  बर्डे  की  रातो  में  पीके  लुड्कना
वो  रूठना  मानना फिर प्यार भरी बाते 
वो  बंक  वो  मुलाकाते
वो  लैब  वो  लिब्ररी 
वो  सोना  टेम्पररी
वो  मूवी  वो  म्यूजिक
वो  कार्ड्स  के  मजिक
वो  परपोजल  की  प्लानिंग  में  राते  गुजरना
हर  एक  को  दोस्त  की  भाभी  बताना
लेक्चर  से  ज्यादा  उसको  निहारना
फिर  क्लास  मे  पीछे  की  सीट  पर  सो  जाना
उसकी  नज़र  मे  शरीफ बन  जाना
न  रह  गए  वो  दिन ना  रह  गयी  वो  राते
ना  रहे  गए  वो  वक़्त ना  रहे  गयी  वो  बाते
अगर  रहे  गयी  तो  बस  कुछ  यादे
वो  कॉलेज  की  यादे  वो  कॉलेज  की  यादे


वक़्त की मार है 
या धूप थोड़ी तेज है 
आज फिर शहर मे निकला हूँ 
और गर्दिशों का शोर है 
रास्तो पर काफिले है 
और दूर कही उजाला है
चल पड़ा हूँ मौज मे
एक आस के सहारे पर
नीले बिखरे हुये इस अम्बर पर
आज रोशनी का का कहर है
भूंख से बेहाल तन
पसीनों मे सराबोर है
टूटते कदमो पर साथ छोड़ता साया है
हर डगर मंजिल है
और हर डगर अंजान है
और फिर एक गुजरते दिन मे
मंजिल से अंजान हूँ
सोच रहा हूँ खड़ा खड़ा
वक़्त की मार है
या मरा हुआ इंसान हूँ




जब कुछ याद सुहानी हो 
कोई पास तराना हो
तब तुम आना री सखी
मेरा साथ निभाने को
कोई वक़्त का किस्सा सुनना

कोई गजल प्रेम की गाना
तब तुम आना री सखी
कोई राग सुनाना तुम
कोई मधुर गीत गाना
तभी मन का मीत होगा
अपना भी प्रीत होगा
मेरा मन भी तेरा है
तेरा मन भी मेरा है
तब तुम आना री सखी
कोई प्रेम शब्द कहना
कोई तान मधुर देना


ये हिंदुस्तान है यहाँ सब बिकता है 
बिक जाये धर्म तो ईमान बिकता है
कभी हिन्दू बिकता है कभी मुसलमान बिकता है
ऊँची कीमतों पर यहाँ भगवान बिकता है
आमिरो के अरमानो में गरीबो का खून बिकता है
लग जाये बोली तो इंसान बिकता है
भूख की आस में बचपन बिकता है
मुहँ से छीनकर निवाला बिकता है
बदनाम कोठो पर किसी का तन बिकता है 
बाबू के बंद कमरे में गिरेबान बिकता है
देश की आड़ में राज बिकता है
चंद वोटो की खातिर सरदार बिकता है
गद्दी पर बैठकर शैतान बिकता है 
ये हिंदुस्तान है यहाँ सब बिकता




मेरी बात सुन मेरी बातों से सीख
ये बड़ी काम की बातें है काम निकाल जाने के बाद

ये पेड़ ये पोधे ये पंछी 
उम्र सारी मेरी इनकी छाव मे गुजरी
कौन जाने मेरे दर्द के इंतहा को 
ज़िंदगी मौत थी पर प्यास बुझाने मे गुजरी